मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

'भारतीय भाषाओं में समन्वय : समन्वय की भाषा' पर विशेष व्याख्यान


'भारतीय भाषाओं में समन्वय : समन्वय की भाषा' पर विशेष व्याख्यान






दिनांक: 23 जनवरी, 2026 को कासरगोड: केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा कक्ष संख्या 213, सिंधु ब्लॉक में  "भारतीय भाषाओं में समन्वय एवं समन्वय की भाषा" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस गौरवपूर्ण कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के 'भाषा विज्ञान विभाग' के पूर्व आचार्य प्रो. रमेश चंद्र शर्मा रहे हैं।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विश्वविद्यलय कुल गीत से आरंभ हुई । कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी प्रगति ने किया। विभाग की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) तारु एस. पवार ने मुख्य वक्ता प्रो. रमेश चंद्र शर्मा का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। इसके पश्चात सहायकआचार्य डॉ. सीमा चंद्रन ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और सभी अतिथियों का परिचय कराया।
​मुख्य वक्ता प्रो. रमेश चंद्र शर्मा ने भारतीय भाषाओं की शक्ति और उनकी ऐतिहासिक विरासत पर गहरा प्रकाश डाला। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे: भाषायी विविधता: 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 13,369 मातृभाषाएँ हैं, जिनमें से 2100 भाषाएँ 10,000 से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती हैं। बहुभाषिकता पर उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 50% आबादी बहुभाषी है, जो हमारी सांस्कृतिक एकता का आधार है। ज्ञान की परंपरा: प्रो. शर्मा ने जोर दिया कि भारतीय परंपरा में 'शिक्षा ही ध्वनि' है और अनुवाद की परंपरा यहाँ अत्यंत प्राचीन रही है। मातृभाषा का महत्व: उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि, "एक से अधिक भाषाएँ सीखें, परंतु अपनी मातृभाषा को कभी न छोड़ें।"
पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मनु (पूर्व विभागाध्यक्ष): उन्होंने भाषा विज्ञान (Linguistics) के तकनीकी पहलुओं पर बात की और अपनी स्वरचित कविता "एक संजीदगी सोच" का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हिन्दी अधिकारी डॉ. अनीश कुमार टी. के. (केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय) ने  भाषा की मानवीय संवेदना पर बल देते हुए कहा कि मनुष्य के दर्द की भाषा एक ही होती है, बाहरी रूप केवल माध्यम है।
​ हिन्दी विभाग्ग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तारु एस. पवार (अध्यक्षीय भाषण): उन्होंने अनुभव को 'अमृत' की संज्ञा दी और हिंदी के वैश्विक विस्तार तथा भाषायी समन्वय पर अपने विचार व्यक्त किए।
​अंत में जिज्ञासा समाधान एवं शोधार्थी संवाद हेतु व्याख्यान के उपरांत प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किया गया जिसमें शोधार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई: शोधार्थी प्रियंका ने भारतीय ज्ञान परंपरा के अंग्रेजी अनुवाद पर निर्भरता को लेकर प्रश्न किया। ​मोहम्मद इलियास ने नई शिक्षा नीति (NEP) में भाषा विज्ञान के प्रावधानों और भाषायी राजनीति पर वक्ता के विचार जाने।

कार्यक्रम के अंत में सहायक आचार्य डॉ. राम बिनोद रे ने सभी वक्ताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर विभाग के समस्त शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

रिपोर्ट लेखन - शोधार्थी - मूलचन्द्र कनौजिया, मान सिंह 

कार्यक्रम के संयोजक - डॉ. सीमा चंद्रन 
            सह संयोजक  डॉ. राम बिनोद रे 


गणतंत्र दिवस समारोह, वर्ष - 2026

 गणतंत्र दिवस समारोह

केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय 

दिनांक 26 जनवरी 77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय में गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस समारोह के अंतर्गत नृत्य, देशभक्ति गीत तथा योग नृत्य जैसे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम की शुरुआत माननीय कुलपति प्रोफेसर सिद्ध पी. अलगुर द्वारा झंडा रोहण से हुयी इसके बाद सुरक्षा गार्डों और विद्यालय के बच्चों द्वारा बैंड के साथ परेड करते हुए राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी गयी। प्रोफेसर सिद्ध पी. अलगुर ने अपने संबोधन में कहा कि - आज ही के दिन 1950 में हमारा संविधान लागू हुआ जिसके तहत हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त हुयी, इसलिए जरूरी नहीं है कि हम एक दूसरे की विचार धारा से पूर्णताः सहमत हों, उन्होंने शोधार्थियों-विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्राप्त करनी है केवल कक्षा कक्ष में प्राप्त होने शिक्षा ही नहीं उसके बाहर की कौशल आधारित शिक्षा जो हमें एक रोजगार प्रदान कर सके। इसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें हिंदी विभाग की ओर से डाॅ. राम बिनोद रे (सहायक आचार्य) प्रियंका जवंजाल, दिवाकर कौशिक, (शोधार्थी) ऋतुवर्णा एम. के., कीर्ति राज पी., मंजिमा पी., मौहिबा अब्दुल लतीफ, नंदिता के. वी., आयशतु सदीदह, अश्वती (स्नातकोत्तर उत्तरार्द्ध) शिव प्रसाद (कंप्यूटर साइंस) की टीम ने सामुहिक देशभक्ति गीत वंदे मातरम, ऐ वतन वतन आबाद रहे तू गीत (Patriotic Song) पर प्रस्तुति की। 

      इस कार्यक्रम में हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राम बिनोद रे की सक्रिय उपस्थिति रही। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने तैयारी करके  प्रभावशाली प्रस्तुति दी।

इस प्रस्तुति को दर्शकों द्वारा अत्यंत सराहा गया और कार्यक्रम का वातावरण देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गया।

इस कार्यक्रम ने हम सभी के भीतर देशप्रेम, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।

माननीय कुलपति प्रो. सिद्दु पी.आलगुर ने सभी प्रतिभागियों के साथ सामुहिक फोटो सेशन में भाग लिया।


   रिपोर्ट लेखन - मंजिमा पी. , स्नातकोत्तर छात्रा  

'भारतीय भाषाओं में समन्वय : समन्वय की भाषा' पर विशेष व्याख्यान

'भारतीय भाषाओं में समन्वय : समन्वय की भाषा' पर विशेष व्याख्यान दिनांक: 23 जनवरी, 2026 को  कासरगोड: केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के ...