शनिवार, 9 मई 2026

हिन्दी विभाग एवं हिन्दी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित हिन्दी कार्यशाला

 

हिन्दी विभाग एवं हिन्दी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित हिन्दी कार्यशाला



दिनांक 6 मई 2026 को, हिन्दी विभाग एवं हिन्दी प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित हिन्दी कार्यशाला ने विश्वविद्यालय के समूह ‘ख’ एवं ‘ग’ के 20 कर्मचारियों को अनुवाद की डिजिटल दुनिया से परिचित कराया। कार्यशाला का शुभारम्भ दोपहर 2 बजे विश्वविद्यालय, ब्रह्मपुत्र ब्लॉक की कम्प्यूटर प्रयोगशाला में हुआ। वित्त, स्थापना, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ, शैक्षणिक अनुभाग, एस्टेट, छात्र कल्याण और स्वास्थ्य केन्द्र जैसे विविध विभागों के 20 कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया। हिन्दी विभाग से डॉ. सुप्रिया पी. ने कार्यक्रम के मुख्य विषयों से परिचित कराया, डॉ. धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने गूगल-डॉक और स्प्रेडशीट के माध्यम से अनुवाद करने की प्रक्रिया बताई। हिन्दी प्रकोष्ठ से डॉ. अनीश कुमार टी.के. (हिन्दी अधिकारी), दिव्या और आदर्श (हिन्दी अनुवादक) ने प्रतिभागियों को व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन दिया। शोधार्थी तरुण कुमार ने सरकारी अनुवाद उपकरण ‘भारती’ पर गहनता से बात की और मनोज बिस्वास ने तकनीकी सहायता प्रदान की। सत्र को पूर्णतः व्यावहारिक रखा गया था- कोई केवल देखने वाला नहीं था, हर कोई एक सक्रिय शिक्षार्थी था। 


इस कार्यशाला के आयोजन के पीछे एक सुस्पष्ट और तत्काल आवश्यकता थी। प्री-वर्कशॉप सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया कि 55% कर्मचारियों ने ‘भारती’ उपकरण का नाम तक नहीं सुना था, और गूगल-डॉक, गूगल स्प्रेडशीट की अनुवाद क्षमता से भी अनभिज्ञ थे। अनुवाद का काम अब भी मैनुअल रूप से किया जा रहा था। इस पृष्ठभूमि में कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य निर्धारित किए गए: पहला- कर्मचारियों को ‘भारती’ अनुवाद प्लेटफ़ॉर्म से परिचित कराना और उन पर हाथ आज़माने का अवसर देना। दूसरा- Google Docs, Google Sheets, Google Slides में अंतर्निहित अनुवाद सुविधाओं से अवगत कराना, जो अब तक अधिकांश कर्मचारियों के लिए अज्ञात थीं। तीसरा - ASR (स्वचालित वाक् पहचान) अर्थात बोलकर हिन्दी टाइप करने की प्रक्रिया सिखाना। चौथा- Translation Memory (LTM, GTM एवं NMT) के माध्यम से सटीक तकनीकी और प्रशासनिक शब्दावली तक पहुँच सुनिश्चित करना। और पाँचवाँ- हिन्दी में आधिकारिक कार्य के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।

इस कार्यशाला का प्रभाव केवल तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं रहा। यह एक मानसिक बदलाव भी लेकर आई। जो कर्मचारी पहले हिन्दी में आधिकारिक संचार से हिचकिचाते थे, उन्होंने अब नए उत्साह के साथ यह स्वीकार किया कि डिजिटल उपकरणों की सहायता से राजभाषा हिन्दी का उपयोग न केवल संभव है, बल्कि कुशल और समयबद्ध भी है।



कार्यशाला के पश्चात् एकत्र किए गए Google Form डेटा ने जो चित्र प्रस्तुत किया, वह अत्यंत उत्साहजनक था। सत्र की समग्र गुणवत्ता और सामग्री की स्पष्टता दोनों को 5 में से 4.58 की औसत रेटिंग मिली - यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रतिभागियों की संतुष्टि का प्रमाण है। विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि 100% प्रतिभागियों ने यह इरादा व्यक्त किया कि वे भविष्य में ‘भारती’ उपकरण का उपयोग अपने आधिकारिक कार्यों में करेंगे। Instant Translation फीचर को 94.7% प्रतिभागियों ने सबसे उपयोगी और आसान बताया। हिन्दी विभाग और हिन्दी प्रकोष्ठ का यह संयुक्त प्रयास इस बात का उदाहरण है कि शिक्षण संस्थाएँ केवल छात्रों को नहीं, बल्कि अपने समस्त स्टाफ को भी सतत रूप से प्रशिक्षित कर सकती हैं और एक भाषायी रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर कार्यबल का निर्माण कर सकती हैं।





कार्यशाला : राजभाषा कार्यान्वन : व्यावहारिक अनुप्रयोग

 

कार्यशाला : राजभाषा कार्यान्वन : व्यावहारिक अनुप्रयोग 





हिन्दी विभाग द्वारा केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के ब्रह्मपुत्र ब्लॉक में दिनांक 14 फरवरी 2026 को समूह 'ख' एवं समूह 'ग' के कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाता का उद्देश्य हिंदी के डिजिटल प्रयोग, तकनीकी माध्यमों में उसकी उपयोगिता तथा अनुवाद संबंधी आधुनिक सॉफ्टवेयरों के प्रयोग को सरल और प्रभावी ढंग से समझाना था। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं शोधार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।



कार्यशाला का उद्‌घाटन सत्र : प्रातः 10:00 बजे से 10.30 बजे तक

कार्यक्रम का शुभारंभ राजभाषा अधिकारी डॉ.अनीश कुमार टी. के द्वारा स्वागत भाषण से हुआ । उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए बताया कि आज के समय में डिजिटल माध्यमों में हिंदी का प्रभावी उपयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है। साथ ही उन्होंने इस प्रकार की कार्यशालाओं को कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए उपयोगी बताया।

हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तारु एस पवार द्वारा उ‌द्घाटन वक्तव्य दिया गया। अपने संबोधन में उन्होंने हिंदी भाषा की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डिजिटल युग में हिंदी केवल संप्रेषण की भाषा नहीं, बल्कि तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों की भी एक महत्वपूर्ण भाषा बनती जा रही है। उन्होंने प्रतिभागियों को हिंदी के तकनीकी प्रयोगों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया।


आशीर्वचन एवं प्रेरणात्मक वक्तव्य हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ.सीमा चंद्रन और डॉ.राम विनोद रे द्वारा दिया गया। दोनों वक्ताओं ने हिंदी भाषा के व्यावहारिक पक्ष, उसके संवर्धन तथा तकनीकी युग में उसकी बढ़ती संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए।


कार्यशाला का प्रथम सत्र  (प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक) :  
'हिंदी का सुगम प्रयोग डिजिटल माध्यम से'

इस सत्र में सहायक आचार्य डॉ. सीमा चंद्रन ने हिंदी टाइपिंग, यूनिकोड, ई-मेल, कार्यालयी कार्यों, सोशल मीडिया तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों में हिंदी के प्रभावी उपयोग पर विस्तृत चर्चा की। उन्होने  यह भी बताया कि किस प्रकार डिजिटल तकनीक हिंदी को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान कर रही है। प्रतिभागियों को विभिन्न डिजिटल उपकरणों एवं ऑनलाइन माध्यमों के प्रयोग संबंधी व्यावहारिक जानकारी भी दी गई। इस सत्र ने उपस्थित कर्मचारियों में हिंदी के तकनीकी उपयोग के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न की।





कार्यशाला का द्वितीय सत्र (अपराह्न 2.00 बजे से 5:00 बजे तक) : 
'भारती 2.O, लिला, Google एवं अन्य सॉफ्टवेयरों में अनुवाद'

इस सत्र में सहायक आचार्य डॉ. राम बिनोद रे ने आधुनिक अनुवाद सॉफ्टवेयरों और डिजिटल उपकरणों के व्यावहारिक प्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की और प्रतिभागियों से विभिन्न प्रकारों के माध्यम से अभ्यास करवाया। उन्होंने यह बताया कि इन तकनीकी माध्यमों की सहायता से हिंदी अनुवाद कार्य को अधिक सरल, त्वरित एवं प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होने 'भारती 2.O (Global Memory of Translation) - LTM, GTM, NMT', 'कंठस्थ (Memory Board), मंत्रा राजभाषा, लीला (लीला प्रवाह, लीला प्रबोध, लीला प्रवीण)', 'हिन्दी 6.O' आदि  प्रयोगों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया कि डिजिटल अनुवाद एवं शिक्षण उपकरण वर्तमान समय में प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों में कितने उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। यह सत्र प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रयोगपरक रहा है।








पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों में विशेष उत्साह एवं सक्रियता देखने को मिली। प्रतिभागियों ने 'भारती 2.O' पर पंजीकरण कर अनुवाद अभ्यास किया। कार्यशाला ने हिंदी भाषा के तकनीकी और व्यावहारिक पक्ष को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान किया। साथ ही यह कार्यक्रम हिंदी के डिजिटत भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित करने में भी सफल रहा।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन राजभाषा अधिकारी डॉ.अनीश कुमार टी. के द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी वक्ताओं एवं  प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाता की सफलता के लिए सभी को शुभकामनाएँ दी। इस प्रकार यह कार्यशाला ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं अत्यंत सफल रही।








रिपोर्ट लेखन : मूलचंद, प्रदुन कुमार 
 







प्रशिक्षुता कार्यक्रम के समापन समारोह की रिपोर्ट

 प्रशिक्षुता कार्यक्रम के समापन समारोह की रिपोर्ट






केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिन्दी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षुता कार्यक्रम का समापन समारोह दिनांक 30 अप्रैल 2026 को प्रातः 10 बजे, कक्ष संख्या 201, हिन्दी विभाग, सिंधु ब्लॉक में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम 10 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक संचालित किया गया था।

समारोह का शुभारम्भ स्वागत भाषण से हुआ, जिसे डॉ. राम बिनोद रे ने प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का क्रमवार स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

इसके पश्चात उद्घाटन उद्बोधन प्रो. (डॉ.) मनु द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने प्रशिक्षुओं की मेहनत की सराहना करते हुए पूर्व प्रशिक्षुओं द्वारा किए गए कार्यों से भी अवगत कराया तथा वर्तमान प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षुओं ने अपने अनुभव साझा किए। अभिजीत वेलायुधन, अश्वती तम्बान, धनुषा, गया एम एवं अनाद्या के. ने अपने सुखद एवं प्रेरणादायक अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि विभाग के अध्यापकगणों ने उन्हें पूर्ण सहयोग प्रदान किया, साथ ही शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का सहयोग भी उन्हें निरंतर प्राप्त होता रहा।

इसी क्रम में सभी प्रशिक्षुओं ने प्रो. (डॉ.) मनु को अपनी ओर से स्मृति-चिह्न के रूप में एक फोटो फ्रेम भेंट किया, जो इस प्रशिक्षण अवधि की यादों को संजोए रखने का प्रतीक था।

मुख्य अतिथि श्रीमती धन्या के. पी. ने अपने वक्तव्य में प्रशिक्षुओं को हिंदी भाषा के प्रयोग के लिए प्रेरित किया तथा उनके प्रयासों की सराहना की।




अध्यक्षीय भाषण प्रो. (डॉ.) तारू एस. पवार द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए भविष्य में इसे और अधिक सुव्यवस्थित एवं प्रभावी रूप से संचालित करने का आश्वासन दिया।

आशीर्वचन के रूप में डॉ. धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने प्रशिक्षुओं के साथ हुए अपने अनुभवों को साझा करते हुए उनके प्रयासों की प्रशंसा की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुप्रिया पी. द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।

समारोह का संचालन शोधार्थी प्रियंका द्वारा सुव्यवस्थित एवं प्रभावपूर्ण ढंग से किया गया, जिससे कार्यक्रम क्रमबद्ध रूप से सम्पन्न हुआ। समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ और यह कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं स्मरणीय सिद्ध हुआ।











रिपोर्ट लेखन - आदित्य
फोटो संकलन - इलियास, दिवाकर

हिंदी विभाग में प्रशिक्षण स्वागत कार्यक्रम का आयोजन

हिंदी विभाग में प्रशिक्षण स्वागत कार्यक्रम का आयोजन





हिंदी विभाग, केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा दिनांक 10 मार्च 2026 को प्रशिक्षण हेतु आए विद्यार्थियों के स्वागत के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रशिक्षण की उपयोगिता तथा नई शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत इसके महत्व से परिचित कराना था। 





कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राम बिनोद रे ने किया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तारु एस. पवार, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मनु, सहायक आचार्य डॉ. सीमा चंद्रन तथा सहायक आचार्य डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह सहित विभाग के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।




अपने अध्यक्षीय संबोधन में विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तारु एस पवार ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम नई शिक्षा नीति-2020 का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में व्यावहारिक कौशल और कार्यकुशलता का विकास करना है। उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ती डिग्रियों और घटते कौशल के बीच के अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि केवल शैक्षणिक उपाधियाँ पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों को अपने भीतर व्यावहारिक दक्षताओं का भी विकास करना चाहिए। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर सीखने और आत्मविकास के लिए प्रेरित किया।





पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मनु ने विद्यार्थियों को ‘इंटर्नशिप’ शब्द के व्यापक अर्थ से परिचित कराया। उन्होंने विद्यार्थी जीवन की गंभीरता और अनुशासन पर बल देते हुए कहा कि एक जागरूक विद्यार्थी वही होता है, जो अपने प्रत्येक कार्य की गहराई और उद्देश्य को समझता है। उनका वक्तव्य विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा।





सहायक आचार्य डॉ. सीमा चंद्रन ने अपने संबोधन में कहा कि आज के विद्यार्थियों में ऊर्जा, प्रतिभा और संभावनाएँ अत्यधिक हैं, किंतु बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सीमित अवसरों के कारण उन्हें अधिक सजग, परिश्रमी और कौशलयुक्त  बनने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को समय के साथ स्वयं को निरंतर समानांतर क्रियाशील बनाए रखने का संदेश दिया।





निष्कर्ष एवं समापन 

कार्यक्रम का समापन डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह के प्रेरणादायी वक्तव्य के साथ हुआ। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कंप्यूटर एवं तकनीकी कौशल के महत्व पर प्रकाश डाला। 





यह स्वागत कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। कार्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया, बल्कि उन्हें अपने भविष्य के प्रति अधिक सजग एवं सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। 










रिपोर्ट लेखन - मान सिंह , प्रदुन कुमार

फोटो संकलन - इलियास, दिवाकर

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

हिन्दी विभाग : संवर्धन और गति



केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय  

हिन्दी विभाग : संवर्धन और गति





जनवरी 2026 से पूर्व 


विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में हिन्दी प्रतियोगिताएँ - 2026

 

विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में हिन्दी प्रतियोगिताएँ

 



केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय, कासरगोड के हिन्दी विभाग द्वारा 21 जनवरी 2026 को विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों में हिन्दी भाषा के प्रति रचनात्मक अभिरुचि को प्रोत्साहित करना था। विश्वविद्यालय के सिंधु ब्लॉक स्थित हिन्दी विभाग में आयोजित इस कार्यक्रम के अंतर्गत तीन प्रमुख प्रतियोगिताएँ हिन्दी प्रश्नोत्तरी, हिन्दी कविता पाठ तथा हिन्दी गीत रखी गईं।

 

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता



सबसे पहले हिन्दी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का सत्र आयोजित किया गया, जिसका संचालन शोधार्थी प्रदुन कुमार ने और उनका सहयोग शोधार्थी आदित्य ने किया। इस रोचक सत्र में प्रतिभागियों ने हिन्दी भाषा, साहित्य, रचनाकार एवं समसामयिक विषयों से सम्बन्धित विविध प्रश्नों के उत्तर देकर अपने ज्ञान का परिचय दिया।

 

कविता पाठ प्रतियोगिता 



प्रश्नोत्तरी के पश्चात् हिन्दी कविता पाठ प्रतियोगिता का सत्र आरम्भ हुआ, जिसका संचालन शोधार्थी नवीन कुमार शाह ने किया। प्रतिभागियों ने विभिन्न रचनाकारों की कविताओं का प्रभावपूर्ण पाठ कर हिन्दी काव्य परंपरा की समृद्धि को सामने रखा। 

 

गीत गायन प्रतियोगिता



अगला और दिन का अंतिम प्रतियोगी सत्र हिन्दी गीत गायन प्रतियोगिता का रहा, जिसका संचालन शोधार्थी मान सिंह ने किया। इस सत्र में प्रतिभागियों ने फिल्मी गीतों के माध्यम से हिन्दी भाषा-संगीत की मधुरता का वातावरण निर्मित किया 

 

समापन एवं पुरस्कार वितरण

सभी प्रतियोगिताओं के संपन्न होने के पश्चात् समापन तथा पुरस्कार वितरण सत्र आयोजित किया गया, जिसका संचालन शोधार्थी इलियास मोहम्मद ने किया। समापन सत्र का आरम्भ विश्वविद्यालय के कुलगीत के सामूहिक गायन के साथ हुआ

समापन सत्र में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तारु एस. पवार तथा पर्यटन विभाग से आमंत्रित अतिथि डॉ. सुनील तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इन्हीं के करकमलों से विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेताओं एवं प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र तथा पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर प्रो. पवार ने अपने संक्षिप्त संबोधन में विश्व हिन्दी दिवस की प्रासंगिकता तथा विभाग की शैक्षणिक व सांस्कृतिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को हिन्दी के सृजनात्मक उपयोग के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में इस कार्यक्रम के संयोजक विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राम बिनोद रे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, अतिथि आचार्यों, निर्णायकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा तकनीकी एवं कार्यालयीन सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए विश्व हिन्दी दिवस-2026 के सफल आयोजन को सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। इस प्रकार विश्व हिन्दी दिवस समारोह उत्साह, सहभागिता और रचनात्मकता के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ

 


रिपोर्ट लेखन – प्रदुन कुमार

फोटो – दिवाकर, मूलचंद

ब्रोशर – प्रदुन कुमार

कार्यक्रम सहयोग – मंजिमा,  लक्ष्मी

मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

'भारतीय भाषाओं में समन्वय : समन्वय की भाषा' पर विशेष व्याख्यान


'भारतीय भाषाओं में समन्वय : समन्वय की भाषा' पर विशेष व्याख्यान






दिनांक: 23 जनवरी, 2026 को कासरगोड: केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा कक्ष संख्या 213, सिंधु ब्लॉक में  "भारतीय भाषाओं में समन्वय एवं समन्वय की भाषा" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस गौरवपूर्ण कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के 'भाषा विज्ञान विभाग' के पूर्व आचार्य प्रो. रमेश चंद्र शर्मा रहे हैं।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विश्वविद्यलय कुल गीत से आरंभ हुई । कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी प्रगति ने किया। विभाग की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) तारु एस. पवार ने मुख्य वक्ता प्रो. रमेश चंद्र शर्मा का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। इसके पश्चात सहायकआचार्य डॉ. सीमा चंद्रन ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और सभी अतिथियों का परिचय कराया।
​मुख्य वक्ता प्रो. रमेश चंद्र शर्मा ने भारतीय भाषाओं की शक्ति और उनकी ऐतिहासिक विरासत पर गहरा प्रकाश डाला। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे: भाषायी विविधता: 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 13,369 मातृभाषाएँ हैं, जिनमें से 2100 भाषाएँ 10,000 से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती हैं। बहुभाषिकता पर उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 50% आबादी बहुभाषी है, जो हमारी सांस्कृतिक एकता का आधार है। ज्ञान की परंपरा: प्रो. शर्मा ने जोर दिया कि भारतीय परंपरा में 'शिक्षा ही ध्वनि' है और अनुवाद की परंपरा यहाँ अत्यंत प्राचीन रही है। मातृभाषा का महत्व: उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि, "एक से अधिक भाषाएँ सीखें, परंतु अपनी मातृभाषा को कभी न छोड़ें।"
पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मनु (पूर्व विभागाध्यक्ष): उन्होंने भाषा विज्ञान (Linguistics) के तकनीकी पहलुओं पर बात की और अपनी स्वरचित कविता "एक संजीदगी सोच" का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हिन्दी अधिकारी डॉ. अनीश कुमार टी. के. (केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय) ने  भाषा की मानवीय संवेदना पर बल देते हुए कहा कि मनुष्य के दर्द की भाषा एक ही होती है, बाहरी रूप केवल माध्यम है।
​ हिन्दी विभाग्ग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तारु एस. पवार (अध्यक्षीय भाषण): उन्होंने अनुभव को 'अमृत' की संज्ञा दी और हिंदी के वैश्विक विस्तार तथा भाषायी समन्वय पर अपने विचार व्यक्त किए।
​अंत में जिज्ञासा समाधान एवं शोधार्थी संवाद हेतु व्याख्यान के उपरांत प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किया गया जिसमें शोधार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई: शोधार्थी प्रियंका ने भारतीय ज्ञान परंपरा के अंग्रेजी अनुवाद पर निर्भरता को लेकर प्रश्न किया। ​मोहम्मद इलियास ने नई शिक्षा नीति (NEP) में भाषा विज्ञान के प्रावधानों और भाषायी राजनीति पर वक्ता के विचार जाने।

कार्यक्रम के अंत में सहायक आचार्य डॉ. राम बिनोद रे ने सभी वक्ताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर विभाग के समस्त शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

रिपोर्ट लेखन - शोधार्थी - मूलचन्द्र कनौजिया, मान सिंह 

कार्यक्रम के संयोजक - डॉ. सीमा चंद्रन 
            सह संयोजक  डॉ. राम बिनोद रे 


हिन्दी विभाग एवं हिन्दी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित हिन्दी कार्यशाला

  हिन्दी विभाग एवं हिन्दी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित हिन्दी कार्यशाला दिनांक 6 मई 2026 को, हिन्दी विभाग एवं हिन्दी प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्त्वाव...