हिन्दी विभाग एवं हिन्दी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित हिन्दी कार्यशाला
दिनांक 6 मई 2026 को, हिन्दी विभाग एवं हिन्दी प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित हिन्दी कार्यशाला ने विश्वविद्यालय के समूह ‘ख’ एवं ‘ग’ के 20 कर्मचारियों को अनुवाद की डिजिटल दुनिया से परिचित कराया। कार्यशाला का शुभारम्भ दोपहर 2 बजे विश्वविद्यालय, ब्रह्मपुत्र ब्लॉक की कम्प्यूटर प्रयोगशाला में हुआ। वित्त, स्थापना, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ, शैक्षणिक अनुभाग, एस्टेट, छात्र कल्याण और स्वास्थ्य केन्द्र जैसे विविध विभागों के 20 कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया। हिन्दी विभाग से डॉ. सुप्रिया पी. ने कार्यक्रम के मुख्य विषयों से परिचित कराया, डॉ. धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने गूगल-डॉक और स्प्रेडशीट के माध्यम से अनुवाद करने की प्रक्रिया बताई। हिन्दी प्रकोष्ठ से डॉ. अनीश कुमार टी.के. (हिन्दी अधिकारी), दिव्या और आदर्श (हिन्दी अनुवादक) ने प्रतिभागियों को व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन दिया। शोधार्थी तरुण कुमार ने सरकारी अनुवाद उपकरण ‘भारती’ पर गहनता से बात की और मनोज बिस्वास ने तकनीकी सहायता प्रदान की। सत्र को पूर्णतः व्यावहारिक रखा गया था- कोई केवल देखने वाला नहीं था, हर कोई एक सक्रिय शिक्षार्थी था।
इस कार्यशाला के आयोजन के पीछे एक सुस्पष्ट और तत्काल आवश्यकता थी। प्री-वर्कशॉप सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया कि 55% कर्मचारियों ने ‘भारती’ उपकरण का नाम तक नहीं सुना था, और गूगल-डॉक, गूगल स्प्रेडशीट की अनुवाद क्षमता से भी अनभिज्ञ थे। अनुवाद का काम अब भी मैनुअल रूप से किया जा रहा था। इस पृष्ठभूमि में कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य निर्धारित किए गए: पहला- कर्मचारियों को ‘भारती’ अनुवाद प्लेटफ़ॉर्म से परिचित कराना और उन पर हाथ आज़माने का अवसर देना। दूसरा- Google Docs, Google Sheets, Google Slides में अंतर्निहित अनुवाद सुविधाओं से अवगत कराना, जो अब तक अधिकांश कर्मचारियों के लिए अज्ञात थीं। तीसरा - ASR (स्वचालित वाक् पहचान) अर्थात बोलकर हिन्दी टाइप करने की प्रक्रिया सिखाना। चौथा- Translation Memory (LTM, GTM एवं NMT) के माध्यम से सटीक तकनीकी और प्रशासनिक शब्दावली तक पहुँच सुनिश्चित करना। और पाँचवाँ- हिन्दी में आधिकारिक कार्य के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।
इस कार्यशाला का प्रभाव केवल तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं रहा। यह एक मानसिक बदलाव भी लेकर आई। जो कर्मचारी पहले हिन्दी में आधिकारिक संचार से हिचकिचाते थे, उन्होंने अब नए उत्साह के साथ यह स्वीकार किया कि डिजिटल उपकरणों की सहायता से राजभाषा हिन्दी का उपयोग न केवल संभव है, बल्कि कुशल और समयबद्ध भी है।
कार्यशाला के पश्चात् एकत्र किए गए Google Form डेटा ने जो चित्र प्रस्तुत किया, वह अत्यंत उत्साहजनक था। सत्र की समग्र गुणवत्ता और सामग्री की स्पष्टता दोनों को 5 में से 4.58 की औसत रेटिंग मिली - यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रतिभागियों की संतुष्टि का प्रमाण है। विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि 100% प्रतिभागियों ने यह इरादा व्यक्त किया कि वे भविष्य में ‘भारती’ उपकरण का उपयोग अपने आधिकारिक कार्यों में करेंगे। Instant Translation फीचर को 94.7% प्रतिभागियों ने सबसे उपयोगी और आसान बताया। हिन्दी विभाग और हिन्दी प्रकोष्ठ का यह संयुक्त प्रयास इस बात का उदाहरण है कि शिक्षण संस्थाएँ केवल छात्रों को नहीं, बल्कि अपने समस्त स्टाफ को भी सतत रूप से प्रशिक्षित कर सकती हैं और एक भाषायी रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर कार्यबल का निर्माण कर सकती हैं।