कार्यशाला : राजभाषा कार्यान्वन : व्यावहारिक अनुप्रयोग
हिन्दी विभाग द्वारा केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के ब्रह्मपुत्र ब्लॉक में दिनांक 14 फरवरी 2026 को समूह 'ख' एवं समूह 'ग' के कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाता का उद्देश्य हिंदी के डिजिटल प्रयोग, तकनीकी माध्यमों में उसकी उपयोगिता तथा अनुवाद संबंधी आधुनिक सॉफ्टवेयरों के प्रयोग को सरल और प्रभावी ढंग से समझाना था। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं शोधार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
कार्यशाला का उद्घाटन सत्र : प्रातः 10:00 बजे से 10.30 बजे तक
कार्यक्रम का शुभारंभ राजभाषा अधिकारी डॉ.अनीश कुमार टी. के द्वारा स्वागत भाषण से हुआ । उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए बताया कि आज के समय में डिजिटल माध्यमों में हिंदी का प्रभावी उपयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है। साथ ही उन्होंने इस प्रकार की कार्यशालाओं को कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए उपयोगी बताया।
हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तारु एस पवार द्वारा उद्घाटन वक्तव्य दिया गया। अपने संबोधन में उन्होंने हिंदी भाषा की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डिजिटल युग में हिंदी केवल संप्रेषण की भाषा नहीं, बल्कि तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों की भी एक महत्वपूर्ण भाषा बनती जा रही है। उन्होंने प्रतिभागियों को हिंदी के तकनीकी प्रयोगों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया।
आशीर्वचन एवं प्रेरणात्मक वक्तव्य हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ.सीमा चंद्रन और डॉ.राम विनोद रे द्वारा दिया गया। दोनों वक्ताओं ने हिंदी भाषा के व्यावहारिक पक्ष, उसके संवर्धन तथा तकनीकी युग में उसकी बढ़ती संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यशाला का प्रथम सत्र (प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक) :
'हिंदी का सुगम प्रयोग डिजिटल माध्यम से'
इस सत्र में सहायक आचार्य डॉ. सीमा चंद्रन ने हिंदी टाइपिंग, यूनिकोड, ई-मेल, कार्यालयी कार्यों, सोशल मीडिया तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों में हिंदी के प्रभावी उपयोग पर विस्तृत चर्चा की। उन्होने यह भी बताया कि किस प्रकार डिजिटल तकनीक हिंदी को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान कर रही है। प्रतिभागियों को विभिन्न डिजिटल उपकरणों एवं ऑनलाइन माध्यमों के प्रयोग संबंधी व्यावहारिक जानकारी भी दी गई। इस सत्र ने उपस्थित कर्मचारियों में हिंदी के तकनीकी उपयोग के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न की।
कार्यशाला का द्वितीय सत्र (अपराह्न 2.00 बजे से 5:00 बजे तक) :
'भारती 2.O, लिला, Google एवं अन्य सॉफ्टवेयरों में अनुवाद'
इस सत्र में सहायक आचार्य डॉ. राम बिनोद रे ने आधुनिक अनुवाद सॉफ्टवेयरों और डिजिटल उपकरणों के व्यावहारिक प्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की और प्रतिभागियों से विभिन्न प्रकारों के माध्यम से अभ्यास करवाया। उन्होंने यह बताया कि इन तकनीकी माध्यमों की सहायता से हिंदी अनुवाद कार्य को अधिक सरल, त्वरित एवं प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होने 'भारती 2.O (Global Memory of Translation) - LTM, GTM, NMT', 'कंठस्थ (Memory Board), मंत्रा राजभाषा, लीला (लीला प्रवाह, लीला प्रबोध, लीला प्रवीण)', 'हिन्दी 6.O' आदि प्रयोगों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया कि डिजिटल अनुवाद एवं शिक्षण उपकरण वर्तमान समय में प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों में कितने उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। यह सत्र प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रयोगपरक रहा है।
पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों में विशेष उत्साह एवं सक्रियता देखने को मिली। प्रतिभागियों ने 'भारती 2.O' पर पंजीकरण कर अनुवाद अभ्यास किया। कार्यशाला ने हिंदी भाषा के तकनीकी और व्यावहारिक पक्ष को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान किया। साथ ही यह कार्यक्रम हिंदी के डिजिटत भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित करने में भी सफल रहा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन राजभाषा अधिकारी डॉ.अनीश कुमार टी. के द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाता की सफलता के लिए सभी को शुभकामनाएँ दी। इस प्रकार यह कार्यशाला ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं अत्यंत सफल रही।
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