शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य भाषण प्रतियोगिता

 


प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य भाषण प्रतियोगिता 

              146 वें प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित भाषण प्रतियोगिता दिनांक 29 जुलाई 2026 को केरल केन्द्रीय विश्व विद्यालय के हिन्दी विभाग में कमरा संख्या 201 में हुआ 










































नव आगंतुक छात्रों के लिए स्वागत कार्यक्रम और प्रशिक्षुता कार्यक्रम

 


    नव आगंतुक छात्रों के लिए स्वागत कार्यक्रम और प्रशिक्षुता कार्यक्रम 



केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में  दिनांक 13 जुलाई 2026 को नव आगंतुक छात्रों के लिए स्वागत कार्यक्रम रखा गया, जिसमें विभाग सभी अध्यापक गण मौजूद रहें 


केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में  दिनांक 13 जुलाई 2026 को महात्मा गांधी महाविद्यालय से पधारे छात्रों के लिए प्रशिक्षुता कार्यक्रम रखा गया, जिसमें विभाग सभी अध्यापक गण मौजूद रहें




















































शोधार्थी श्री धनराज की खुली मौखिक प्रस्तुति का आयोजन

 



शोध प्रबंध की खुली मौखिक प्रस्तुति


आज दिनांक 09 जुलाई 2026,  गुरुवार को प्रातः 11 बजे, हिन्दी विभाग केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के शोधार्थी श्री धनराज (पंजीकरण संख्या: LHC072101) के शोध प्रबंध ‘इक्कीसवीं शताब्दी के प्रमुख हिन्दी उपन्यासों में अभिव्यक्त किसान विमर्श’ की खुली मौखिक प्रस्तुति का आयोजन मिश्रित रूप (हाइब्रिड मोड) में विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में किया गया। आयोजन में उनके शोध निर्देशक हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राम बिनोद रे प्रत्यक्ष तौर पर उपस्थित रहे।



इस अवसर पर प्रस्तुत मौखिकी के अध्यक्ष के रूप में केरल के कालीकट विश्वविद्यालय, हिन्दी विभाग से वरिष्ठ आचार्य प्रो. (डॉ.) प्रमोद कोवप्रथ आभासी पटल पर मौजूद रहे। इसके साथ ही विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तारु एस पवार (अप्रत्यक्ष रूप से), पूर्व विभागाध्यक्ष  प्रोफेसर डॉ मनु , सहायक आचार्या डॉ. सीमा चंद्रन, सहायक आचार्य डॉ. धर्मेन्द्र प्रताप सिंह एवं सहायक आचार्या डॉ. सुप्रिया पी उपस्थित रही हैं। 






मौखिकी का आरम्भ सर्वप्रथम शोध निर्देशक के रूप में उपस्थित सहायक आचार्य डॉ. राम बिनोद रे के द्वारा भारत और किसान से संबंधित कुछ विचारों को सांझा कर आदरणीय अध्यक्ष महोदय के परिचय का वाचन कर उनके सत्कार के साथ हुआ।



अगले क्रम में अध्यक्ष की अनुमति के पश्चात शोधार्थी की प्रस्तुति शुरू हुई जिसमें उन्होंने क्रमानुसार शीर्षक परिचय, उद्देश्य, अध्याय विभाजन और निष्कर्ष को भली भाँति अभिव्यक्त किया। अपने शोध निष्कर्ष के रूप में उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं शताब्दी के हिन्दी उपन्यासों में किसान केवल कृषि उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का केन्द्रीय पात्र है, साहित्य कृषि नीतियों और सामाजिक चेतना के मध्य संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम रहा है आदि अन्य कुछ व्यक्त निष्कर्षों  के साथ शोधार्थी ने अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। तत्पश्चात खुले मंच की गरिमा बनाए रखते हुए शोध के गहन विश्लेषण एवं आकलन पर दृष्टिपात करते हुए प्रश्नों की शृंखला की शुरुआत की गयी।

सवालों के क्रम में अध्यक्ष महोदय ने अपना पहला सवाल श्री धनराज के समक्ष रखते हुए कहा कि उपन्यास में उपन्यासकारों ने जो यथार्थ प्रस्तुत किया है उससे समाज में उपस्थित यथार्थ में कैसे तालमेल या साम्य-वैषम्य देखने को मिलता है ? जिसका  प्रतिउत्तर देते हुए शोधार्थी ने मुख्यतः फाँस उपन्यास की भूमि को बताते हुए एवं संजीव के फाँस को लिखते समय किसानों की समस्या को समझने के प्रयास को बताया। अध्यक्ष के द्वारा किए गए अगले सवाल जिसमें उन्होंने उपन्यास में किसान समस्या में कल्पना और यथार्थ से जुड़ा प्रश्न पूछा इसके अतिरिक्त भी अन्य चार सवाल उनके द्वारा किए गए जिसका अपने विवेकी दृष्टिकोण से उत्तर देते हुए शोधार्थी ने अपनी भूमिका का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन किया। 

शृंखला के बढ़ते कदम में शोधार्थियों ने भी कुछ गहन सवाल और सुझाव दिए इसके पश्चात हिन्दी विभाग के प्रो.(डॉ) मनु ने भी किसान जीवन को लेकर प्रश्न पूछा और कहा कि जो जीत लेता उनकी जय हम बोलतें है, हारने वाले की जय किस प्रकार देखते हैं? जिसका जवाब शोधार्थी ने किसानों के सकारात्मक आत्मबल की ओर इंगित करते हुए दिया। इस कड़ी के अंतिम पायदान की ओर अग्रसारित होते हुए परिणाम के रूप में अध्यक्ष महोदय ने शोधार्थी को बधाई देते हुए डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की। 





समापन की ओर बढ़ते हुए धन्यवाद ज्ञापन का जरूरी औपचारिक कार्यभार शोध निर्देशक डॉ. राम बिनोद रे के द्वारा संभाला गया। उसके पश्चात अपने शोध के दौर के अनुभव को व्यक्त करते हुए  सभी सहायक जनों को शोधार्थी धन राज के द्वारा आभार प्रेषित किया गया। जीवन की इस विशेष उपलब्धि पर विभाग के समस्त आचार्यों के द्वारा उन्हें वर्तमान की बधाई एवं अग्रिम जीवन के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं।

  सेफाली राय

शोधार्थी, हिन्दी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग



'रुख़्सत' विदाई समारोह का आयोजन

 



        दिनांक 20 मई 2026 के दिन केंद्रीय विश्वविद्यालय केरल के हिन्दी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग द्वारा एम.ए. अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के उपलक्ष्य में भावनाओं, स्मृतियों और शुभकामनाओं से सजा “रुख़्सत” शीर्षक से एक गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन सिंधु ब्लॉक सेमिनार हॉल में किया गया। प्रथम वर्ष की छात्रा नंदिताजय ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों का स्वागत किया तथा विशेष रूप से प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने अपने अपने अग्रज द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों का चॉकलेट और यादों के एक फोटो को भेंट करते हुए उत्साहपूर्वक स्वागत किया।


           विभागाध्यक्ष आचार्य डॉ. तारू एस पवार सर के अशीर्वाचनों एवं विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के शुभकामना सहित केक काटते हुए कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। विभाग के वरिष्ट आचार्य डॉ. मनु सर ने बच्चों को जीवन में धैर्यवान, मृदुभाषी बने रहने का आशीर्वाद देते हुए बच्चों के साथ बीतें स्मृतियों को विशेषकर बच्चों के साथ मिलकर किया गया आकाशवाणी कोझिकोड का उल्लेख तथा एक शॉर्ट विडियो के माध्यम से दो वर्ष के पलों को सभी से सांझा किया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने अनुजों को धन्यवाद करते हुए दो वर्षों का अनुभव सांझा करने का सिलसिला विद्यार्थी राहुल से हुआ। खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने शिक्षकों, अपने सहपाठियों, अनुजों और शोधर्थियों से जैसा रिश्ता रहा उन सभी अनुभवों को खुले मन से सांझा किया। विद्यार्थियों ने डॉ. सीमा मैम व डॉ. सुप्रिया मैम की सख्ती और स्नेह का, डॉ. राम बिनोद सर की बुलंद आवाज़ तथा डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह सर का लखनऊ विश्वविद्यालय का कक्षा में जिक्र करना साथ ही कुछ विद्यार्थियों ने जैसे श्रीलक्ष्मी एस ने डॉ. राम बिनोद सर का तथा ऋतुवर्णा ने विभागाध्यक्ष तारु सर की क्लास रूम की मिमिक्री करते हुए विदाई के बेला को भी हर्षोल्लास से भर दिया था। मंजिमा ने हिन्दी विषय लेने तथा इस विश्वविद्यालय को चुनने का कारण तथा यहां का अनुभव बताया। छात्रा मौहिबा ने विश्वविद्यालयी जीवन के दो वर्ष को ज़िंदगी का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय माना। विद्यार्थी नंदकिशोर ने अनुभवों एक कविता के साथ सांझा किया। इसके पहले ही विभाग के शोधार्थी अदित्या ने बशीर बद्र गजल-शेर ‘तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है, तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा’ के साथ कार्यक्रम का जोरदार आगाज कर दिया था। विद्यार्थी अश्विनी और फातिमा ने अनुभव बयां किया तथा शोधार्थी मनोज बिस्वास को स्नेहभरा फोटोफ्रेम भी भेंट किया।

बच्चों के अनुभव सांझा हने के पश्चात विभाग के सदस्य डॉ. राम बिनोद रे ने शिक्षक-शिष्य के विश्वास भरे संबंध का जिक्र किया और आशीर्वाद दिया। डॉ. धर्मेन्द्र प्रताप सर ने भविष्य की शुभेच्छा देते हुए कक्षा गुजरे पलों खास तौर से विद्यार्थी राहुल के बारे में बताया कि राहुल सर को क्लास में कम कॅम्पस में ज्यादा दिखे। डॉ. सुप्रिया मैम ने बच्चों की बेहतर भविष्य की कामना करते हुए ढेर सारा आशीर्वाद दिया तथा यह भी बताया कि बच्चों के भलाई के लिए शिक्षकों को थोड़ा सख्त होना पड़ता है। डॉ. सीमा मैम ने प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को पाँच पांडव की संज्ञा देते हुए कार्यकरम के आयोजन के लिए उन्हें बधाई तथा अंतिम वर्ष विद्यार्थियों को प्यार और आशीर्वाद दिया।



कार्यक्रम के अंत से पहले द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने शिक्षकगणों को स्मृतिचिन्ह के रूप में फोटोफ्रेम दिया। उसके पश्चात श्रीलक्ष्मी एस ने एक मधुर गीत प्रस्तुत की तथा द्वितीय वर्ष के छात्रों ने एक सांकृतिक नृत्य किया। कार्यक्रम की अंतिम कड़ी में भोजन हुआ। भोजन के दौरान ही एक कलात्मक विडियो के जरिए दो साल खास पलों को दर्शाया गया था। “अपने साथ यादों का बड़ा सा सूटकेस लेकर जाओ” थीम पर आधारित यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बना।

प्रस्तुति
मनोज बिस्वास
शोधार्थी, हिन्दी विभाग

Extension Activity (प्रसार गतिविधियां) दिनांक 21 मई 2026

 


 

 

Extension Activity (प्रसार गतिविधियां)

    दिनांक 21 मई 2026 को केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग एवं कन्नड़ विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कर्नाटक राज्य स्थित फर्स्ट ग्रेड कॉलेज, सुरलिया में एक शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महाविद्यालय के विद्यार्थियों को हिन्दी भाषा की वैश्विक उपयोगिता, रोजगारपरक संभावनाओं तथा केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों से परिचित कराना था।

कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्राचार्य के करकमलों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं उद्घाटन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कन्नड़ विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सौम्या ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान गतिविधियों तथा विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध विविध अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वविद्यालय की गरिमामयी उपलब्धियों एवं राष्ट्रीय स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा से विद्यार्थियों को अवगत कराया।

इसके पश्चात हिन्दी एवं कन्नड़ विभाग के प्रतिनिधियों द्वारा महाविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ संवाद (Interaction) आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को हिन्दी भाषा की वैश्विक महत्ता, विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाओं तथा उच्च शिक्षा के अवसरों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों, छात्रावास, समृद्ध पुस्तकालय, आधुनिक शिक्षण सुविधाओं तथा आभासी (Virtual) पटल के माध्यम से उपलब्ध शिक्षण व्यवस्था की भी जानकारी दी गई।



कार्यक्रम के अंतर्गत निबंध लेखन एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक एवं बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों में भाषा, साहित्य एवं सामान्य ज्ञान के प्रति रुचि और जागरूकता का विकास हुआ।



कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने इस कार्यक्रम की उपयोगिता की सराहना की तथा भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक एवं प्रेरणात्मक कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

समग्र रूप से यह कार्यक्रम अत्यंत सफल एवं उद्देश्यपूर्ण रहा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को हिन्दी भाषा, उच्च शिक्षा तथा केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।

 


प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य भाषण प्रतियोगिता

  प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य भाषण प्रतियोगिता                146 वें प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित भाषण प्रतियोगिता दिनांक 29 जुलाई ...