शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

'रुख़्सत' विदाई समारोह का आयोजन

 



        दिनांक 20 मई 2026 के दिन केंद्रीय विश्वविद्यालय केरल के हिन्दी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग द्वारा एम.ए. अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के उपलक्ष्य में भावनाओं, स्मृतियों और शुभकामनाओं से सजा “रुख़्सत” शीर्षक से एक गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन सिंधु ब्लॉक सेमिनार हॉल में किया गया। प्रथम वर्ष की छात्रा नंदिताजय ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों का स्वागत किया तथा विशेष रूप से प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने अपने अपने अग्रज द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों का चॉकलेट और यादों के एक फोटो को भेंट करते हुए उत्साहपूर्वक स्वागत किया।


           विभागाध्यक्ष आचार्य डॉ. तारू एस पवार सर के अशीर्वाचनों एवं विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के शुभकामना सहित केक काटते हुए कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। विभाग के वरिष्ट आचार्य डॉ. मनु सर ने बच्चों को जीवन में धैर्यवान, मृदुभाषी बने रहने का आशीर्वाद देते हुए बच्चों के साथ बीतें स्मृतियों को विशेषकर बच्चों के साथ मिलकर किया गया आकाशवाणी कोझिकोड का उल्लेख तथा एक शॉर्ट विडियो के माध्यम से दो वर्ष के पलों को सभी से सांझा किया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने अनुजों को धन्यवाद करते हुए दो वर्षों का अनुभव सांझा करने का सिलसिला विद्यार्थी राहुल से हुआ। खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने शिक्षकों, अपने सहपाठियों, अनुजों और शोधर्थियों से जैसा रिश्ता रहा उन सभी अनुभवों को खुले मन से सांझा किया। विद्यार्थियों ने डॉ. सीमा मैम व डॉ. सुप्रिया मैम की सख्ती और स्नेह का, डॉ. राम बिनोद सर की बुलंद आवाज़ तथा डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह सर का लखनऊ विश्वविद्यालय का कक्षा में जिक्र करना साथ ही कुछ विद्यार्थियों ने जैसे श्रीलक्ष्मी एस ने डॉ. राम बिनोद सर का तथा ऋतुवर्णा ने विभागाध्यक्ष तारु सर की क्लास रूम की मिमिक्री करते हुए विदाई के बेला को भी हर्षोल्लास से भर दिया था। मंजिमा ने हिन्दी विषय लेने तथा इस विश्वविद्यालय को चुनने का कारण तथा यहां का अनुभव बताया। छात्रा मौहिबा ने विश्वविद्यालयी जीवन के दो वर्ष को ज़िंदगी का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय माना। विद्यार्थी नंदकिशोर ने अनुभवों एक कविता के साथ सांझा किया। इसके पहले ही विभाग के शोधार्थी अदित्या ने बशीर बद्र गजल-शेर ‘तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है, तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा’ के साथ कार्यक्रम का जोरदार आगाज कर दिया था। विद्यार्थी अश्विनी और फातिमा ने अनुभव बयां किया तथा शोधार्थी मनोज बिस्वास को स्नेहभरा फोटोफ्रेम भी भेंट किया।

बच्चों के अनुभव सांझा हने के पश्चात विभाग के सदस्य डॉ. राम बिनोद रे ने शिक्षक-शिष्य के विश्वास भरे संबंध का जिक्र किया और आशीर्वाद दिया। डॉ. धर्मेन्द्र प्रताप सर ने भविष्य की शुभेच्छा देते हुए कक्षा गुजरे पलों खास तौर से विद्यार्थी राहुल के बारे में बताया कि राहुल सर को क्लास में कम कॅम्पस में ज्यादा दिखे। डॉ. सुप्रिया मैम ने बच्चों की बेहतर भविष्य की कामना करते हुए ढेर सारा आशीर्वाद दिया तथा यह भी बताया कि बच्चों के भलाई के लिए शिक्षकों को थोड़ा सख्त होना पड़ता है। डॉ. सीमा मैम ने प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को पाँच पांडव की संज्ञा देते हुए कार्यकरम के आयोजन के लिए उन्हें बधाई तथा अंतिम वर्ष विद्यार्थियों को प्यार और आशीर्वाद दिया।



कार्यक्रम के अंत से पहले द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने शिक्षकगणों को स्मृतिचिन्ह के रूप में फोटोफ्रेम दिया। उसके पश्चात श्रीलक्ष्मी एस ने एक मधुर गीत प्रस्तुत की तथा द्वितीय वर्ष के छात्रों ने एक सांकृतिक नृत्य किया। कार्यक्रम की अंतिम कड़ी में भोजन हुआ। भोजन के दौरान ही एक कलात्मक विडियो के जरिए दो साल खास पलों को दर्शाया गया था। “अपने साथ यादों का बड़ा सा सूटकेस लेकर जाओ” थीम पर आधारित यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बना।

प्रस्तुति
मनोज बिस्वास
शोधार्थी, हिन्दी विभाग

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य भाषण प्रतियोगिता

  प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य भाषण प्रतियोगिता                146 वें प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित भाषण प्रतियोगिता दिनांक 29 जुलाई ...